
03सेवाएँ
फसल प्रबंधन परामर्श
उपज, गुणवत्ता और बाज़ार समय सुधारने वाला व्यावहारिक नियोजन.
संक्षेप में
मौसम समय-सीमा वाले निर्णयों की शृंखला है. उस शृंखला को हम काग़ज़ पर उतारते हैं — कब बोना है, क्या और कब देना है, किस पर नज़र रखनी है, और छिड़काव वास्तव में कब ज़रूरी है — ताकि फसल पर प्रतिक्रिया देने के बजाय उसका प्रबंधन हो.
03.01
बुवाई समय-सारणी नियोजन
- चरणबद्ध रोपण, ताकि आय चरणों में आए
- जलवायु और वर्षा पैटर्न पर आधारित उपयुक्त बुवाई अवधि
- बाज़ार से जुड़ी बुवाई — जब भाव अनुकूल रहने की संभावना हो

03.02
उर्वरक नियोजन
- आधारीय, वानस्पतिक, पुष्पन और फलन अवस्थाओं के अनुसार समय-सारणी
- मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व सिफ़ारिश
- ड्रिप लगी होने पर फर्टिगेशन योजना
- जैविक और रासायनिक का संतुलित कार्यक्रम
- मात्रा, समय और अदल-बदल के साथ छिड़काव सारणी
- प्रतिरोध प्रबंधन नियोजन


03.03
कीट और रोग पहचान
- स्थान के अनुसार बनाई गई फसल कैलेंडर
- नियमित फसल निगरानी
- कीट की पहचान
- छिड़काव से पहले निगरानी

03.04
एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम)
- छिड़काव से पहले निगरानी
- फेरोमोन ट्रैप का उपयोग
- चिपचिपे ट्रैप
- जैविक नियंत्रण
- नीम-आधारित उत्पाद
- आर्थिक क्षति स्तर पार होने पर ही रासायनिक छिड़काव

इससे आपको क्या मिलता है
उपज
उपज तय करने वाली अवस्था पर समय से पोषण.
गुणवत्ता
कटाई से पहले ही अवशेष और श्रेणी का प्रबंधन.
बाज़ार समय
भाव के रुझान के अनुसार नियोजित बुवाई.
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- नया खेत बना रहे हैं?
- मौजूदा खेत सुधार रहे हैं?
- बेहतर उत्पादकता की तलाश में हैं?
आइए बनाएँ बेहतर कृषि रणनीति.
ज़मीन कितनी है, कहाँ है और आप उससे क्या चाहते हैं, बताइए. ज़मीन को पहले क्या चाहिए, वह लेकर हम लौटेंगे.
