
जिन फसलों में हम सहायता करते हैं
फल, सब्ज़ियाँ, बाग़, फूल और उच्च-मूल्य फसलें.
यहाँ हर फसल की अपनी निर्णायक बाधा है — कोई कीट, छँटाई की अवधि, बाज़ार का महीना. कार्यक्रम किसी सामान्य कैलेंडर के नहीं, उसी बाधा के इर्द-गिर्द बनाया जाता है.

मिर्च
थ्रिप्स और वायरस के दबाव के कारण निगरानी और छिड़काव की अदल-बदल निर्णायक हो जाती है.

टमाटर
चरणबद्ध बुवाई रोग और बाज़ार दोनों का जोखिम बाँट देती है.

बैंगन
तना और फल छेदक कैलेंडर से नहीं, ट्रैप और सीमा-स्तरों से संभाला जाता है.

भिंडी
एक दिन छोड़कर तुड़ाई; पीला शिरा मोज़ेक सबसे पहले किस्म तय करता है.

आलू
बीज की गुणवत्ता और कंद बनने के समय का तापमान खाद से कहीं अधिक श्रेणी तय करते हैं.

सहजन
हर फ्लश के बाद छँटाई से फलियाँ पहुँच में रहती हैं और पेड़ फलता रहता है.

ढींगरी मशरूम
ज़मीन नहीं — स्पॉन की गुणवत्ता, नमी और साफ़ कमरा यह फसल तय करते हैं.

पत्तागोभी
डायमंडबैक मॉथ कार्यक्रम तय करता है; गाँठ की कसावट कटाई की तारीख तय करती है.

फूलगोभी
किस्म महीने से मिलानी पड़ती है — गलत परिपक्वता वर्ग में फूल छोटे रह जाते हैं या बोल्ट हो जाते हैं.

गाजर
गहरी, कंकड़-रहित क्यारी आकार तय करती है; विरलन माप तय करता है.

मूली
महीने भर में तैयार, इसलिए एक साथ नहीं, हफ़्ते के अंतर पर थोड़ी-थोड़ी बुवाई.

चुकंदर
ठंडे मौसम की जड़; समान नमी रखने पर ही यह रेशेदार नहीं होता.

अनार
बहार उपचार और कैनोपी प्रबंधन पूरे साल का रिटर्न तय करते हैं.

अमरूद
छँटाई और फसल नियमन फल का आकार और श्रेणी तय करते हैं.

आम
पुष्पन अवस्था का पोषण और भुनगा नियंत्रण फल बनने की रक्षा करते हैं.

केला
ऊतक संवर्धित पौधे, ड्रिप फर्टिगेशन और घौद का आवरण ही यहाँ उपज तय करते हैं.

अंगूर
साल की दो छँटाई फसल तय करती हैं, और अवशेष सीमाएँ खरीदार.

पपीता
रिंग स्पॉट वायरस और जल निकासी किस्म से अधिक बाग़ की उम्र तय करते हैं.

कटहल
लंबी अवधि की बाग़ फसल, जिसमें शुरुआती दूरी नियोजन लाभ देता है.

तरबूज
मल्चिंग, ड्रिप और परागण की सही अवधि आकार और मिठास दोनों तय करते हैं.

खरबूजा
मिठास आखिरी दस दिनों में बनती है, इसलिए सिंचाई तुड़ाई के बाद नहीं, पहले रोकी जाती है.

स्ट्रॉबेरी
रनर की गुणवत्ता और ठंडी रोपाई अवधि तय करती है कि मौसम कमाई देगा या नहीं.

संतरा
बहार उपचार फूल तय करता है; कैनोपी और सिला नियंत्रण उसे बचाए रखते हैं.

मौसंबी
राज्य में अधिकतर हस्त बहार उपयुक्त है; बाकी जल निकासी तय करती है.

नींबू
बेमौसम फ्लश पर ही दाम मिलता है, इसलिए बहार का समय ही पूरी योजना है.

लौकी
मचान की बनावट और फल मक्खी प्रबंधन बिक्री योग्य उपज तय करते हैं.

तोरई
करेला, चिचिंडा और टिंडा पर भी यही मचान और आईपीएम कार्यक्रम लागू होता है.

करेला
मचान और जाली पर; फल मक्खी बाद में छिड़काव से नहीं, पहले ट्रैप से रोकी जाती है.

कद्दू
तुड़ाई के बाद हफ़्तों टिकता है, इसलिए मंदे बाज़ार में सहारा बनता है.

गेंदा
बाज़ार के लिए उगाया जाता है और सब्ज़ी आईपीएम में ट्रैप फसल के रूप में भी लगाया जाता है.

गुलाब
तने की लंबाई के लिए संरक्षित खेती में; श्रेणी खिले फूल से नहीं, कली से तय होती है.

मोगरा
भोर से पहले तुड़ाई और उसी सुबह बिक्री — शृंखला पहले से बिठानी पड़ती है.

गुलदाउदी
छोटे दिन की फसल; जिस त्योहार के लिए लेनी है, उससे पीछे गिनकर रोपाई तय होती है.

जरबेरा
पॉलीहाउस का कट फ्लावर; तने की लंबाई और साफ़ फूल श्रेणी तय करते हैं, इसलिए नमी और जड़ सड़न रोज़ संभालनी पड़ती है.

हल्दी
नौ महीने ज़मीन में रहती है, इसलिए बीज प्रकंद का स्वास्थ्य ही अधिकांश रिटर्न तय करता है.

अदरक
उठी क्यारियाँ और प्रकंद सड़न फसल तय करती हैं; बीज उपचार वैकल्पिक नहीं है.

धनिया
पत्ती के लिए घनी और बीज के लिए विरल बुवाई — यह निर्णय पहली सिंचाई से पहले होता है.

काली मिर्च
छाया में जीवित सहारे पर चढ़ाई जाती है; वर्षा से अधिक जल निकासी मायने रखती है.

दालचीनी
छाल के लिए कटाई होती है, इसलिए कटाई का ढंग मिट्टी जितना ही मायने रखता है.

इमली
कलमी पेड़ बीजू से कई साल पहले फलते हैं, जिससे पूरी योजना बदल जाती है.

पान (नागरबेल)
छाया में जीवित सहारे पर; पत्ते का रंग और बिना टूटा पत्ता दाम तय करते हैं.

नारियल
थाला सिंचाई और पोटाश पेड़ की उम्र से कहीं अधिक फल संख्या तय करते हैं.

काजू
फूल चाय मच्छर कीट के समय ही आते हैं; छिड़काव की अवधि संकरी और तय है.

सुपारी
लंबी अवधि की फसल; दूरी और छाया पहले दशक की अंतरफसल तय करती हैं.

कॉफ़ी
छाया में उगाई जाती है; फूल और उसके बाद की बौछारें साल की फसल तय करती हैं.

चाय
तय चक्र पर तुड़ाई — श्रेणी झाड़ी से नहीं, अंतराल से तय होती है.

रबर
पहले साल की उपज नहीं, टैपिंग पैनल प्रबंधन पेड़ का कार्यकाल तय करता है.

जूही
इत्र उद्योग के लिए भोर से पहले तुड़ाई; उपज वज़न से नहीं, फूलों की संख्या से गिनी जाती है.

रोज़ जेरेनियम
साल में दो-तीन कटाई और पत्तियाँ तुरंत आसवन को — तेल पत्ती में होता है, इसलिए छाया और दूरी तय करती है.

दवना
सर्दी की छोटी फसल; तेल सर्वाधिक होने पर, फूल आने पर कटाई.

केवड़ा
तटीय और जल-प्रिय; आसवन केवल नर मंजरी का होता है, इसलिए रोपाई शुरू से नर-मादा देखकर.

लेमनग्रास
कमज़ोर ज़मीन पर भी टिकती है; कुछ महीनों में कटाई और तेल के लिए घंटों के भीतर आसवन.
इनमें भी सहायता
- चिचिंडा
- टिंडा
- उच्च-मूल्य सब्ज़ियाँ
- विदेशी सब्ज़ियाँ
- औषधीय पौधे
- नया खेत बना रहे हैं?
- मौजूदा खेत सुधार रहे हैं?
- बेहतर उत्पादकता की तलाश में हैं?
आइए बनाएँ बेहतर कृषि रणनीति.
ज़मीन कितनी है, कहाँ है और आप उससे क्या चाहते हैं, बताइए. ज़मीन को पहले क्या चाहिए, वह लेकर हम लौटेंगे.
